संपूर्ण आदित्य हृदय स्तोत्र — सभी 31 श्लोक हिंदी अर्थ सहित, MP3 ऑडियो, मुफ्त PDF डाउनलोड, और पाठ विधि। महर्षि अगस्त्य द्वारा भगवान श्री राम को सिखाया गया यह दिव्य सूर्य स्तोत्र।
आदित्य हृदय नामक यह स्तोत्र परम पुण्यदायक, सभी शत्रुओं का नाश करने वाला, विजय प्रदान करने वाला, नित्य अक्षय फल देने वाला और परम कल्याणकारी है। इसका नित्य जप करना चाहिए।
ये सूर्य देव सभी देवताओं के स्वरूप हैं, अत्यंत तेजस्वी हैं और अपनी किरणों से सभी प्राणियों को सत्ता प्रदान करते हैं। ये अपनी किरणों से देवताओं, असुरों और समस्त लोकों का पालन करते हैं।
Verse · श्लोक 8
एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः ।
महेन्द्रो धनदः कालो यमः सोमो ह्यपां पतिः ॥
ये ही ब्रह्मा, विष्णु, शिव, स्कन्द, प्रजापति, इन्द्र, कुबेर, काल, यम, चन्द्रमा और जल के स्वामी वरुण हैं।
आदित्य, सविता, सूर्य, खग (आकाश में चलने वाले), पूषा (पोषण करने वाले), गभस्तिमान (किरणों के स्वामी), सुवर्ण के समान कांतिमान, भानु, हिरण्यरेता (स्वर्ण-तेज के स्रोत), दिवाकर (दिन के रचयिता) — ये सब सूर्य के नाम हैं।
हरित वर्ण के घोड़ों वाले, सहस्र किरणों से युक्त, सात अश्वों वाले रथ पर सवार, किरणों से सुशोभित, अंधकार का नाश करने वाले, कल्याणस्वरूप, सृष्टि के निर्माता, मार्तण्ड और अंशुमान — ये भी सूर्य देव के नाम हैं।
हिरण्यगर्भ (स्वर्णिम गर्भ वाले), शिशिर (शीतलता प्रदान करने वाले), तपन, भास्कर, रवि, अग्निगर्भ, अदिति के पुत्र, शंख (आनंदस्वरूप) और शिशिरनाशन (शीत का नाश करने वाले) हैं।
ये आकाश के स्वामी, अंधकार का भेदन करने वाले, ऋग्वेद-यजुर्वेद-सामवेद के पारगामी, घनघोर वर्षा करने वाले, जल के मित्र और विन्ध्य पर्वत की वीथी में तीव्र गति से चलने वाले हैं।
ये तापमान, मण्डलाकार, मृत्युस्वरूप, पीले वर्ण वाले, सब को तपाने वाले, क्रांतदर्शी कवि, विश्वरूप, महातेजस्वी, रक्तवर्ण और सम्पूर्ण उत्पत्ति के मूल कारण हैं।
Verse · श्लोक 15
नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावनः ।
तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन् नमोऽस्तु ते ॥
नक्षत्रों, ग्रहों और तारों के स्वामी, विश्व को उत्पन्न करने वाले, समस्त तेजों में भी अत्यंत तेजस्वी, द्वादश आदित्य रूपों वाले — हे सूर्य देव! आपको नमस्कार है।
हे राघव! आपत्ति में, कष्ट में, दुर्गम मार्ग में अथवा किसी भय की स्थिति में जो कोई भी पुरुष इन सूर्य देव का कीर्तन (स्तुति) करता है, वह कभी दुखी नहीं होता।
इसलिए हे राम! एकाग्रचित्त होकर देवों के देव जगत्पति सूर्य की पूजा करो। इस आदित्य हृदय का तीन बार जप करने पर तुम युद्ध में निश्चय ही विजय प्राप्त करोगे।
जब श्री राम लंका की रणभूमि में रावण से युद्ध करते-करते थक चुके थे, चिंतामग्न और शोकग्रस्त थे — तब महर्षि अगस्त्य देवताओं के साथ उन्हें देखने आए। राम की पीड़ा देखकर उन्होंने एक अत्यंत गुप्त और शक्तिशाली स्तोत्र उन्हें सिखाया, जो सदियों से ऋषियों के पास सुरक्षित था।
यही है आदित्य हृदय स्तोत्र — सूर्य देव की दिव्य स्तुति। इसके पाठ से श्री राम को नई शक्ति मिली, उन्होंने रावण का वध किया, और धर्म की पुनः स्थापना की। आज भी विश्वभर में लाखों भक्त इसी स्तोत्र का पाठ विजय, स्वास्थ्य, और मानसिक शांति के लिए करते हैं।
यह स्तोत्र वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड के 107वें सर्ग में संकलित है — 31 श्लोकों में रचित यह दिव्य संवाद एक युग का रुख मोड़ने वाला सिद्ध हुआ।
रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्
"उदय होते हुए, किरणों से प्रकाशित, देवताओं और असुरों द्वारा वंदित..."
Sacred Benefits
Benefits of Daily Recitation
हज़ारों वर्षों से ऋषि-मुनि, राजा और सामान्य भक्त इस स्तोत्र का पाठ करते आए हैं। शास्त्र इन फलों की बात करते हैं।
01
Victory Over Enemies
शत्रुओं पर विजय — आंतरिक और बाह्य दोनों। हर चुनौती का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है।
02
Health & Vitality
सूर्य देव प्राण-शक्ति के स्वामी हैं। नियमित पाठ शारीरिक स्वास्थ्य और ऊर्जा को बढ़ाता है।
03
Mental Clarity
मन की उलझन, भय और अवसाद को दूर करता है। चित्त को सूर्य की भांति स्थिर और प्रकाशमान बनाता है।
04
Spiritual Awakening
परम प्रकाश की भक्ति का मार्ग — शाश्वत, अपरिवर्तनीय, सदा प्रकाशमान।
05
Removes Negativity
जैसे सूर्योदय अंधकार मिटाता है, यह स्तोत्र नकारात्मक प्रभावों और कर्म-बाधाओं को दूर करता है।
06
Success in Endeavors
परीक्षा, युद्ध, यात्रा, नए कार्यों — किसी भी महत्वपूर्ण आरंभ से पूर्व इसका पाठ करें।
The Practice
How to Recite Properly
शास्त्र-सम्मत विधि — श्रद्धा और भक्ति के साथ अनुसरण करने पर साधना गहरी होती है।
I
Wake Before Sunrise
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 90 मिनट पूर्व) सबसे शुभ समय है। स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
II
Face East
उगते सूर्य की ओर मुख करके बैठें। सूर्य देव को अर्घ्य (जल) अर्पित करें।
III
Chant Three Times
पूर्ण एकाग्रता के साथ संपूर्ण स्तोत्र का तीन बार पाठ करें। प्रत्येक पाठ प्रभाव को गहरा करता है।
IV
Sunday Special
रविवार — सूर्य देव का दिन — और रथ सप्तमी का पाठ विशेष फलदायी होता है।
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अपनी मातृभाषा में आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़ें। हर भाषा में पूरा 31 श्लोक उपलब्ध है।
आदित्य हृदय स्तोत्र सूर्य देव को समर्पित एक पवित्र संस्कृत स्तोत्र है, जिसे महर्षि अगस्त्य ने भगवान श्री राम को रावण से युद्ध के समय सिखाया था। यह स्तोत्र वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड में आता है और इसमें 31 श्लोक हैं जो सूर्य देव के विभिन्न स्वरूपों और गुणों का वर्णन करते हैं।
आदित्य हृदय स्तोत्र के क्या लाभ हैं?+
नियमित पाठ से शत्रुओं पर विजय, रोगों से मुक्ति, मानसिक शांति, आत्मविश्वास में वृद्धि, चिंता-शोक का नाश, आयु में वृद्धि, और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। शास्त्र कहते हैं कि यह स्तोत्र हर प्रकार के संकट से रक्षा करता है।
पाठ करने का सर्वोत्तम समय क्या है?+
ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके पाठ करना सर्वोत्तम है। रविवार और रथ सप्तमी के दिन इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।
इसमें कितने श्लोक हैं?+
आदित्य हृदय स्तोत्र में कुल 31 श्लोक हैं जो अनुष्टुप छंद में रचे गए हैं। प्रत्येक श्लोक सूर्य देव के एक विशिष्ट रूप, गुण या नाम का वर्णन करता है।
क्या महिलाएं पाठ कर सकती हैं?+
हां, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कोई भी कर सकता है। सूर्य देव सब पर समान कृपा करते हैं। श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया पाठ सदैव फलदायी होता है।
क्या संस्कृत न जानने पर भी पाठ कर सकते हैं?+
अवश्य। मूल संस्कृत का सबसे गहरा प्रभाव होता है, परंतु हिंदी या अपनी मातृभाषा में भी पाठ कर सकते हैं। श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है। हमारी वेबसाइट पर 7 भाषाओं में स्तोत्र उपलब्ध है।
Begin Your Practice with Surya's Grace
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